चित्र 81सैर

सौरमंडल के पैमाने वाले मॉडल की सैर

सूर्य को 1.39 m चौड़ी गेंद बना दें, तो पृथ्वी रास्ते पर 150 m दूर 1.27 cm का कंचा बन जाती है, नेपच्यून 4.5 km दूर है और वॉयेजर 1 होता 25.7 km पर।

सौरमंडल के पैमाने वाले मॉडल की सैर
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इस डिवाइस पर 3D मॉडल नहीं दिख सकता। नीचे गाइड के चरण आप लिखित रूप में पढ़ सकते हैं।

1 / 9 1.39 m चौड़ा सूर्ययह गेंद सूर्य है, अपने आकार के एक अरबवें हिस्से में: 1.39 m चौड़ी। रास्ते का हर मीटर दस लाख किलोमीटर के बराबर है। WASD या तीर वाली कुंजियों से चलें, या बटनों से अगले पड़ाव तक चलें या सीधे पहुँचें। गाइड में रास्ते की 70 चीज़ें दर्ज हैं।

घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए स्क्रॉल करें या दो उँगलियों से फैलाएँ।

अपडेट स्रोत जाँचे गए
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अगर सूर्य एक ऐसी गेंद हो जिसके पास आप खड़े हो सकें, तो सौरमंडल कितना बड़ा होगा?

सौरमंडल की ज़्यादातर तस्वीरें धोखा देती हैं। ग्रह एक हाथ की दूरी पर करीने से कतार में बैठे होते हैं, और बृहस्पति सूर्य के बगल में रखी समुद्र-तट की गेंद जैसा दिखता है। यह धोखा मजबूरी है, क्योंकि एक पन्ने पर असली आकार और असली दूरियाँ एक साथ नहीं दिखाई जा सकतीं। यह प्रदर्शनी धोखा नहीं देती। यह हर चीज़ को एक ही गुणक से छोटा करती है, आकार और दूरी दोनों को साथ-साथ, और नतीजे को एक पार्क के रास्ते पर बिछा देती है।

पैमाना एक अरबवाँ है (1 : 1,00,00,00,000)। इस पैमाने पर 13,91,400 km चौड़ा सूर्य 1.39 m चौड़ी चमकती गेंद बन जाता है। पृथ्वी 1.27 cm का कंचा बन जाती है, जो रास्ते पर 149.6 m आगे एक पत्थर के चबूतरे पर रखा है। नेपच्यून 4.5 km दूर है। 1.4 m/s की आम चाल से आप दो मिनट से कम में पृथ्वी तक और 54 मिनट में नेपच्यून तक पहुँच जाते हैं।

रास्ते में खोजने के लिए 70 चीज़ें हैं: सूर्य, आठ ग्रह, पाँच बौने ग्रह, 21 चंद्रमा, दर्जन भर क्षुद्रग्रह और धूमकेतु, नौ अंतरिक्ष यान, और दोनों पट्टियों तथा सूर्य के अपने बुलबुले के किनारे। गाइड बटन इन सबकी सूची दिखाता है। किसी एक को चुनें और आप वहाँ पहुँच जाएँगे।

दस लाख किलोमीटर के लिए एक मीटर

एक अरबवें पैमाने पर रास्ते का एक मीटर दस लाख किलोमीटर के बराबर है, और गेंद का एक मिलीमीटर 1,000 km के बराबर। हर गेंद का व्यास उस पिंड के औसत व्यास को एक अरब से भाग देकर रखा गया है, और हर चबूतरा सूर्य से उस पिंड की औसत दूरी (उसकी कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष) को एक अरब से भाग देकर खड़ा है। आँकड़े NASA NSSDCA की फ़ैक्ट शीट से हैं, और नीचे की तालिका इन्हीं मानों से फिर से निकाली गई है।

पिंड असली व्यास पार्क में गेंद सूर्य की गेंद से दूरी धूप को लगता समय
सूर्य 13,91,400 km 1.39 m 0
बुध 4,879 km 4.9 mm 57.9 m 3 min 13 s
शुक्र 12,104 km 1.21 cm 108.2 m 6 min 1 s
पृथ्वी 12,742 km 1.27 cm 149.6 m 8 min 19 s
मंगल 6,779 km 6.8 mm 228.0 m 12 min 40 s
सेरेस 952 km 0.95 mm 413 m 23 min
बृहस्पति 139,822 km 14.0 cm 778.5 m 43 min 17 s
शनि 116,464 km 11.6 cm 1.43 km 1 h 20 min
यूरेनस 50,724 km 5.07 cm 2.87 km 2 h 39 min
नेपच्यून 49,244 km 4.92 cm 4.51 km 4 h 11 min
प्लूटो 2,376 km 2.4 mm 5.87 km 5 h 26 min

कुछ तुलनाएँ मदद करती हैं। सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का 109 गुना है, इसलिए सूर्य के आयतन को भरने में लगभग 13 लाख पृथ्वियाँ लगेंगी। बृहस्पति अकेला ग्रह है जिसे आप बिना किसी पट्ट के कुछ क़दम दूर से पहचान सकते हैं। बुध, मंगल और प्लूटो इतने छोटे हैं कि रास्ते पर गिर जाएँ तो खो जाएँ।

पहले 230 मीटर में चार छोटे ग्रह

चट्टानी ग्रह जल्दी-जल्दी आते और निकल जाते हैं। बुध 57.9 m पर है, शुक्र और पृथ्वी के बीच 41 m का फ़ासला है, और मंगल 228 m पर है। फिर रास्ता सुनसान हो जाता है। बृहस्पति 778.5 m पर इंतज़ार करता है, शनि 1.43 km पर, यूरेनस 2.87 km पर और नेपच्यून 4.51 km पर। हर फ़ासला लगभग उससे पहले के पूरे रास्ते जितना लंबा है, इसीलिए पैदल चलते हुए बाहरी सौरमंडल इतना ख़ाली लगता है।

मंगल के चबूतरे से बृहस्पति की 14 cm की गेंद 550 m दूर है। वह लगभग 0.015° घेरती है, जो पेड़ों के बीच पहचानने के लिए बहुत छोटा है, इसलिए हर पड़ाव पर एक गोल दिशा-पट्ट है और रास्ते पर हर 50 m पर दूरी का निशान पेंट किया गया है।

रेल पर चंद्रमा

ज़्यादातर चंद्रमा अपने ग्रहों के सामने बहुत छोटे हैं और उनके पास ही हैं। पृथ्वी का चंद्रमा 3.5 mm का मनका है, कंचे से 38.4 cm दूर, अपनी पीतल की कील पर। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कंचे से 0.4 mm ऊपर घूमता, लगभग नाख़ून की मोटाई जितना, और भूस्थिर मौसम और टीवी उपग्रहों का छल्ला 3.6 cm बाहर है। जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन पृथ्वी से 15 लाख km आगे L2 बिंदु के पास काम करती है, इसलिए उसका खंभा कंचे से 1.5 m पीछे है।

मंगल के दोनों चंद्रमा धूल के कण हैं। 22 km चौड़ा फ़ोबोस 0.02 mm का होता और 6.8 mm के मटर से 9.4 mm दूर। मॉडल मंगल के दोनों चंद्रमाओं को बाल जितने पतले तार पर लटकाता है, क्योंकि कील उनसे मोटी होती।

विशाल ग्रहों को ज़्यादा जगह चाहिए। हर चबूतरे से एक पत्थर की रेल निकलती है, और चंद्रमा उस पर अपनी असली दूरी पर खड़े हैं। बृहस्पति के चार बड़े चंद्रमा, जिन्हें गैलीलियो ने 1610 में देखा था, चकोतरे से 42 cm से 1.88 m के बीच हैं। शनि का टाइटन शनि से 1.22 m दूर है और इपेटस 3.56 m। यूरेनस के पाँच बड़े चंद्रमा 58 cm के भीतर समा जाते हैं, और ट्राइटन नेपच्यून से 35.5 cm पर है। प्लूटो का चंद्रमा शैरन प्लूटो की आधी चौड़ाई का है और उससे सिर्फ़ 2 cm दूर, इसीलिए इन दोनों को कभी-कभी दोहरा बौना ग्रह कहा जाता है।

यहाँ आप प्रकाश से तेज़ चल सकते हैं

प्रकाश हर सेकंड 299,792.458 km तय करता है। इसे एक अरब गुना छोटा करें तो पार्क में प्रकाश 0.30 m/s से चलता है। आम चाल 1.4 m/s है, इसलिए यहाँ आप धूप से लगभग पाँच गुना तेज़ निकल सकते हैं। धूप को पृथ्वी के चबूतरे तक पहुँचने में 8 मिनट 19 सेकंड लगते हैं: 14,96,00,000 ÷ 299,792 का मतलब 499 सेकंड, जिसे अक्सर 8 मिनट 20 सेकंड कहा जाता है।

"सूर्य से प्रकाश भेजें" स्विच इसे दिखाता है। एक प्रकाश-स्पंद 0.30 m/s से सूर्य की गेंद से निकलता है और रीडआउट बताता है कि आप उससे कितना आगे या पीछे हैं। 3 m/s की डिफ़ॉल्ट चाल से चलें तो आप प्रकाश से दस गुना तेज़ पृथ्वी तक पहुँचते हैं।

आप कितना तेज़ चल सकते हैं?

गति बटन के चार चरण हैं, और अंक कुंजियाँ 1 से 4 इन्हें सीधे चुनती हैं:

चरण गति सूर्य से पृथ्वी सूर्य से नेपच्यून पूरा रास्ता (10.3 km)
टहलना 1.4 m/s 1.8 min 54 min 2 h 2 min
तेज़ चाल 3 m/s 50 s 25 min 57 min
दौड़ 6 m/s 25 s 12.5 min 29 min
साइकिल 12 m/s 12 s 6.3 min 14.3 min

"अगले तक चलें" आपको चुनी हुई गति से अगले पड़ाव तक ले जाता है। "तेज़ यात्रा" कुछ ही सेकंड में वहाँ पहुँचा देती है, और गाइड सूची की किसी भी चीज़ तक सीधे ले जाती है।

हर पड़ाव से सूर्य सही आकार का दिखता है

पृथ्वी के चबूतरे से 1.39 m चौड़ी और 149.6 m दूर सूर्य की गेंद 0.53° घेरती है। यही कोण असली सूर्य पृथ्वी के आकाश में घेरता है। जब हर लंबाई एक ही गुणक से छोटी होती है, तो हर कोण वैसा ही रहता है। मंगल से यह 0.35° है। नेपच्यून से यह 0.018° है, लगभग एक आर्क-मिनट, जो तेज़ आँख के देख सकने वाले सबसे छोटे ब्योरे के क़रीब है। इसीलिए दूर वाले छोर से मुड़कर देखने पर सूर्य बस एक चमकीला बिंदु दिखता है।

क्षुद्रग्रह पट्टी लगभग ख़ाली क्यों है

दो द्वार रास्ते को 329 m और 479 m पर पार करते हैं, जो 2.2 और 3.2 AU दिखाते हैं, जहाँ मुख्य पट्टी के ज़्यादातर क्षुद्रग्रह घूमते हैं। पट्टी का सबसे बड़ा पिंड और बौना ग्रह सेरेस 413 m पर 0.95 mm का कण है। वेस्टा (525 km) और पलास (512 km) उसके आधे हैं। NASA के अनुसार सारे क्षुद्रग्रह मिलकर भी चंद्रमा से हल्के हैं।

द्वारों के बीच रास्ते पर बिखरी बजरी सिर्फ़ दिखाने के लिए है। इस पैमाने पर एक आम क्षुद्रग्रह धूल के कण से भी छोटा होता, और उनके बीच के फ़ासले ख़ाली हवा के मीटरों में नापे जाते। अंतरिक्ष यान कई बार इस पट्टी को पार कर चुके हैं और उन्हें किसी चीज़ से बचकर निकलना नहीं पड़ा।

इससे भीतर, खंभे उन तीन क्षुद्रग्रहों को दिखाते हैं जहाँ यान गए और नमूने लाए या उतरे: बेन्नू, र्युगु और इरोस। एपोफ़िस का खंभा शुक्र और पृथ्वी के बीच है। 13 अप्रैल 2029 को यह पृथ्वी से 32,000 km दूर से गुज़रेगा, जो इस पैमाने पर कंचे से 3.2 cm है।

काइपर बेल्ट तक

काइपर बेल्ट लगभग 30 से 50 AU तक बर्फ़ीले पिंडों का चौड़ा छल्ला है, और इसके दोनों द्वार सूर्य से 4.49 km और 7.48 km पर हैं। नेपच्यून पहले द्वार के ठीक अंदर है। प्लूटो, 2.4 mm का तिल, 5.87 km पर है। उसके बाद हॉमिया, क्वाओआर, माकेमाके और एरोकोथ के खंभे आते हैं; एरोकोथ वह दो टुकड़ों वाला पिंड है जिसके पास से न्यू होराइज़न्स 1 जनवरी 2019 को गुज़रा।

न्यू होराइज़न्स का अपना खंभा 9.85 km पर है, जहाँ वह अक्टूबर 2026 में था, सूर्य से 65.8 AU दूर। रास्ता 10.3 km पर, एरिस के ठीक बाद ख़त्म होता है। एरिस लगभग ठीक प्लूटो जितना बड़ा है और थोड़ा भारी। 2005 में इसकी खोज ने ही अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ को 2006 में ग्रह की परिभाषा लिखने पर मजबूर किया, और उसी परिभाषा ने प्लूटो को बौने ग्रहों के नए वर्ग में डाल दिया।

रास्ते के अंत में दिशा-पट्ट क्या कहते हैं

बहुत सी चीज़ें किसी पार्क के लिए बहुत दूर हैं। रास्ते के अंत में दिशा-पट्ट हर एक को पार्क की दूरी में बताते हैं:

  • वॉयेजर 1, सबसे दूर का अंतरिक्ष यान, अक्टूबर 2026 में सूर्य से 172 AU दूर था। पार्क में यह 25.7 km है। NASA के हिसाब से यह 18 नवंबर 2026 को पृथ्वी से एक प्रकाश दिन दूर होगा।
  • वॉयेजर 2 144 AU (21.6 km) पर है, और ख़ामोश पायनियर 10 और 11 क्रमशः 142 और 119 AU पर हैं।
  • हीलियोपॉज़, सौर पवन के बुलबुले का किनारा, 121.6 AU दूर था जब वॉयेजर 1 ने 25 अगस्त 2012 को इसे पार किया: पार्क में 18.2 km।
  • ऊर्ट बादल धूमकेतुओं का एक खोल है जिसे किसी ने सीधे नहीं देखा। यह शायद 2,000 से 5,000 AU के बीच कहीं शुरू होता है (पार्क में 300 km या ज़्यादा) और 100,000 AU तक जाता है, जो लगभग 15,000 km होगा।
  • प्रॉक्सिमा सेंटॉरी, सबसे पास का तारा, पार्क में 40,208 km दूर है, यानी पृथ्वी की 40,075 km की भूमध्य रेखा का लगभग एक चक्कर।

तो अगर सूर्य आपके शहर के किसी पार्क में खड़ा हो, तो सबसे पास का तारा धरती के दूसरी ओर लगभग उतनी ही बड़ी एक और गेंद होगा।

पैमाने वाली सैरें जहाँ आप जा सकते हैं

यह एक पसंदीदा विचार है और कई शहरों ने इसे पत्थर और धातु में बनाया है:

  • Voyage, वॉशिंगटन, DC के नेशनल मॉल पर, 17 अक्टूबर 2001 को खुली, एक दस-अरबवें पैमाने पर, यानी इसका दसवाँ भाग। इसका सूर्य 13.9 cm की गेंद है और प्लूटो लगभग 600 m दूर।
  • सेगन प्लैनेट वॉक, इथाका, न्यूयॉर्क में, 1997 में Sciencenter ने कार्ल सेगन की याद में बनाई। यह एक पाँच-अरबवें पैमाने पर 1.2 km चलती है।
  • स्वीडन सोलर सिस्टम स्टॉकहोम के Avicii Arena को सूर्य मानता है, जो दुनिया की सबसे बड़ी गोलाकार इमारतों में से एक है। दो करोड़वें पैमाने पर ग्रह पूरे देश में उत्तर की ओर कतार में हैं।

यहाँ की सैर Voyage से दस गुने पैमाने पर है, जिससे पृथ्वी इतनी बड़ी है कि गेंद की तरह दिखे (1.27 cm), और नेपच्यून तक की सैर फिर भी एक दोपहर में हो जाती है।

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मॉडल असली सौरमंडल से कैसे अलग है

  • सब एक कतार में। ग्रह कभी एक कतार में नहीं आते। हर ग्रह अपनी कक्षा में कहीं होता है, और मॉडल सबको एक पंक्ति में रखता है ताकि एक रास्ता हर एक के पास से गुज़रे।
  • औसत दूरियाँ। हर चबूतरा औसत दूरी पर है। बुध की असली दूरी 4.6 करोड़ से 7 करोड़ km के बीच बदलती है, मंगल की 20.7 करोड़ से 24.9 करोड़ km के बीच, और प्लूटो की 30 से 49 AU के बीच, इसलिए "आज" का चबूतरा कहीं और होता।
  • चंद्रमा एक कतार में। चंद्रमा ग्रह से अपनी औसत दूरी पर एक ही रेल पर खड़े हैं, अपनी कक्षाओं में फैले नहीं।
  • यानों की दूरियों पर तारीख़ है। सौरमंडल छोड़ रहे यान लगातार चलते रहते हैं। वॉयेजर 1 हर साल लगभग 3.6 AU जोड़ता है, जो रास्ते के 540 m हैं।
  • गोल गेंदें। शनि भूमध्य रेखा पर ध्रुव से ध्रुव की तुलना में लगभग 11 % चौड़ा है, और गेंदें औसत व्यास लेती हैं। अंडे के आकार का हॉमिया अकेला है जिसे खिंचा हुआ बनाया गया है।
  • चमक। सूर्य की गेंद चमकती है पर आँखें नहीं चौंधियाती, और ग्रहों पर पार्क की दोपहर की रोशनी पड़ती है, सूर्य की गेंद की नहीं।
  • पेड़, लैंप और बेंच असली आकार के हैं, पैमाने पर नहीं, ताकि आपको पता चले कि आप कितना चल चुके हैं।

पथ बनाने से पहले उसकी गणना

गणना के दोनों ओर लंबाई को पहले m में बदलें। प्रदर्शनी की सारणी में सूर्य का व्यास 13,91,400 km है। इसे 1,000 से गुणा करने पर 1,39,14,00,000 m मिलते हैं। फिर 1,00,00,00,000 से भाग देने पर मॉडल का व्यास 1.3914 m आता है। यदि मूल संख्या km में रखकर भाग देंगे, तो उत्तर भी km में होगा, m में नहीं। इकाई की एक गलती पार्क में रखने योग्य मॉडल को 1,000 गुना छोटा बना सकती है।

पृथ्वी की दूरी पर भी यही नियम लागू होता है। सारणी के 14,95,98,000 km पहले 1,49,59,80,00,000 m बनते हैं और पैमाना लगाने के बाद 149.598 m रह जाते हैं। पृथ्वी का व्यास 12,742 km घटकर 0.012742 m, अर्थात 12.742 mm होता है। दूरी और व्यास की शुरुआती संख्याएँ बहुत अलग हैं, पर भाजक एक ही होना चाहिए। नेपच्यून के 4,51,49,53,000 km पथ पर 4,514.953 m बनते हैं। पड़ाव इन्हीं मानों से रखे गए हैं, स्क्रीन पर देखकर अनुमानित दूरी से नहीं।

मान लें कि दर्शक का प्रत्येक कदम 0.70 m लंबा है। यह गणना के लिए मानी गई कदम की लंबाई है, दर्शक की माप या प्रदर्शनी की सेटिंग नहीं। मॉडल की प्रत्येक दूरी को 0.70 से भाग दें। सूर्य से पृथ्वी लगभग 214 कदम और नेपच्यून लगभग 6,450 कदम दूर हैं। 1.4 m/s पर यह दर्शक हर सेकंड दो कदम चलता है। पृथ्वी तक लगभग 107 सेकंड और नेपच्यून तक लगभग 3,225 सेकंड, यानी 53.8 मिनट लगेंगे। लंबे कदम कदमों की संख्या घटाते हैं, ग्रहों की सही जगह नहीं बदलते।

जाँच का एक तरीका पहले सूर्य का व्यास चुनकर पृथ्वी की दूरी निकालना है। यहाँ वह दूरी सूर्य के लगभग 107.5 व्यास है। कक्षा में सूर्य केवल 10 cm चौड़ा हो, तो पृथ्वी लगभग 10.75 m दूर होनी चाहिए। छोटा सूर्य लगाने पर भी पृथ्वी को 149.598 m पर छोड़ देना दो अलग पैमानों को मिलाना होगा। ऐसा प्रदर्शन सुविधाजनक हो सकता है, पर दृश्य आकार और खाली जगह का अनुपात सुरक्षित नहीं रहेगा।

पाठ्यपुस्तक को एक से अधिक पैमाने क्यों चाहिए

कल्पना करें कि सूर्य और नेपच्यून को 30 cm चौड़े पन्ने के विपरीत किनारों पर रखा जाए। मॉडल के 4,514.953 m को 0.30 m में समेटने के लिए हर लंबाई लगभग 15,050 गुना और घटानी होगी। सूर्य का 1.3914 m व्यास लगभग 0.092 mm रह जाएगा, साधारण पेंसिल की रेखा से भी पतला। पृथ्वी लगभग 0.00085 mm, यानी 0.85 माइक्रोमीटर होगी। दूरी की तुलना में उसे बड़ा किए बिना कोई रंग या नाम उस बिंदु को पहचानने योग्य पृथ्वी नहीं बना सकता।

अब उलटी शर्त रखें: पृथ्वी 1 mm का दिखाई देने वाला बिंदु हो। यह पार्क वाले व्यास का लगभग 1/13 है। तब नेपच्यून पन्ने के दूसरे किनारे पर नहीं, सूर्य से लगभग 354 m दूर होना चाहिए। जब तक पन्ना सैकड़ों मीटर लंबी पट्टी न बन जाए, पुस्तक थोड़ी चौड़ी करने से समस्या हल नहीं होगी। एक फैलाव में आठ सुंदर ग्रह दिखाना और उनके आकार तथा अंतराल सही दिखाना अलग काम हैं।

इसका अर्थ यह नहीं कि हर चित्र अविश्वसनीय है। चित्र कक्षाओं का क्रम, सापेक्ष व्यास, सतह या किसी यान का मार्ग दिखा सकता है। विवरण पढ़कर जानें कि कौन-सी राशियाँ पैमाने पर हैं। कक्षाओं के चित्र में सभी ग्रह बराबर अनुपात से बड़े किए जा सकते हैं, छोटे ग्रह अधिक बढ़ाए जा सकते हैं या बाहरी दूरियाँ संकुचित की जा सकती हैं। ऐसे किसी चित्र पर पैमाना रखकर उड़ान की दूरी नहीं निकालनी चाहिए।

यहाँ की पड़ाव-पंक्ति की भी सीमा है। यह कक्षीय दूरियों की तुलना है, आज ग्रह कहाँ हैं उसका नक्शा नहीं। नेपच्यून के पड़ाव की दूरी से पृथ्वी की दूरी घटाने पर इस विन्यास में सूर्य से दूरियों का अंतर मिलता है। किसी विशेष तारीख को पृथ्वी और नेपच्यून का अंतर नहीं मिलता। वास्तव में सूर्य से उनकी दूरियों के साथ दोनों दिशाओं के बीच का कोण भी मायने रखता है। असली मिशन को पंचांग और प्रक्षेपपथ की गणना चाहिए, दो चबूतरों के बीच सबसे छोटा पैदल मार्ग नहीं।

संकेत का विलंब यान की उड़ान अवधि नहीं है

प्रकाश का स्विच दूरी घटाता है, समय की इकाई नहीं बदलता। सूर्य और पृथ्वी के बीच 14,95,98,000 km के लिए प्रकाश का एकतरफा समय लगभग 499 सेकंड है, जिसे प्रायः 8 मिनट 20 सेकंड कहते हैं। नेपच्यून की दूरी पर लगभग 15,060 सेकंड, यानी 4 घंटे 11 मिनट लगते हैं। मॉडल की प्रकाश-दाल भी संबंधित पड़ावों तक इतने ही समय में पहुँचती है। पैमाने ने उसकी गति लगभग 0.30 m/s की है, धूप को तत्काल नहीं पहुँचाया।

उत्तर आने में एक और विलंब जुड़ता है। एक सरल विचार-प्रयोग में नेपच्यून की औसत सूर्य-दूरी पर रिसीवर रखें और सूर्य से प्रश्न भेजें। तुरंत जवाब मिलने पर भी उसे लौटने में कम से कम लगभग 8 घंटे 22 मिनट लगेंगे। यह एकतरफा विलंब का दुगुना है और इसमें संसाधन समय नहीं जोड़ा गया है। यह पृथ्वी के एंटीना की भविष्यवाणी नहीं है। उसमें पृथ्वी की स्थिति और यान की वास्तविक दूरी शामिल करनी होगी। नियंत्रकों को पृथ्वी से आदेश निकलने का समय और यान के उसे बाद में चला सकने का समय अलग रखना पड़ता है।

NASA का New Horizons मिशन बताता है कि प्रकाश और उड़ान का समय अलग क्यों हैं। यान 19 जनवरी 2006 को प्रक्षेपित हुआ, 28 फरवरी 2007 को बृहस्पति से गुरुत्वीय सहायता ली और 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के पास से गुजरा। प्रक्षेपण से प्लूटो तक लगभग 9.5 वर्ष लगे। फोटॉन ऐसी दूरी घंटों में पार करता है। दूरी को प्रकाश की गति से भाग देना संचार का उत्तर है, यान कब पहुँचेगा इसका नहीं।

बृहस्पति के पास से गुजरने पर यान का मार्ग और गति बदले। यान सामान्यतः लक्ष्य की ओर सीधी रेखा में स्थिर गति से नहीं चलता। वह गुरुत्व के प्रभाव में चलता है और उसकी गति हमेशा पृथ्वी या सूर्य जैसे किसी संदर्भ के सापेक्ष होती है। प्रदर्शनी की गति-सेटिंग पार्क में दर्शक की चाल है, यान का चुना जा सकने वाला इंजन नहीं। तेज यात्रा से प्लूटो तुरंत पहुँचना असली उड़ान की ऊर्जा या प्रक्षेपण अवसर के बारे में कुछ नहीं बताता।

बड़े मॉडल एक देश में फैल जाते हैं

Sweden Solar System उसी पैमाने की समस्या का दूसरा समाधान है। आयोजक 1:2,00,00,000 का पैमाना बताते हैं। स्टॉकहोम का Globe भवन सूर्य है और भीतरी ग्रह स्टॉकहोम क्षेत्र में हैं। मॉडल उत्तर की ओर बढ़ता है। प्लूटो Globe से लगभग 300 km दूर डेल्सबो में है। ये स्थानीय संस्थानों की देखरेख में अलग-अलग स्थापनाएँ हैं, एक जगह खड़े होकर देखे जा सकने वाले सभी पिंड नहीं।

इसे इस प्रदर्शनी के 1:1,00,00,00,000 से तुलना करें। 100 करोड़ को 2 करोड़ से भाग देने पर 50 मिलता है, इसलिए स्वीडन की संबंधित लंबाइयाँ 50 गुना बड़ी हैं। इस प्रदर्शनी के सूर्य पर यह गुणक लगाने पर लगभग 69.6 m, पृथ्वी की दूरी पर लगभग 7.48 km और प्लूटो पर लगभग 293 km मिलते हैं। अंतिम उत्तर को लगभग 300 km कहना उचित है। ये प्रदर्शनी के खगोलीय मानों से की गई गणनाएँ हैं, भवन या स्थापनाओं के बीच सड़क की नई माप नहीं।

इस तुलना से यात्रा के निर्देश पढ़ने में सावधानी की जरूरत भी स्पष्ट होती है। पड़ाव की पैमाने वाली दूरी किसी खगोलीय अंतर को दर्शाती है। सड़क मुड़ सकती है और दर्शक को चक्कर लगाना पड़ सकता है। इसलिए यात्रा-योजना का समय खगोलीय इकाई का दूसरा मापन नहीं है। स्वीडन की स्थापनाओं और छोटे पार्क मॉडल, दोनों को बताना चाहिए कि मापी गई दूरी किसकी है। बस की यात्रा की लंबाई को छोटे किए गए ग्रह की कक्षा की त्रिज्या नहीं मानना चाहिए।

स्क्रीन पर तीन जाँच

सूर्य से शुरू करें और क्षेत्र-मार्गदर्शिका में पृथ्वी चुनें। चलने से पहले अनुमान लगाएँ: लगभग 150 m दूर 1.27 cm का गोला होगा। अनुमान को दूरी के अंक और चबूतरे के छोटे गोले से मिलाएँ। फिर नेपच्यून चुनें। उसके गोले का व्यास पृथ्वी का केवल लगभग 3.9 गुना है, पर सूर्य से उसका पड़ाव लगभग 30.2 गुना दूर है। ये अनुपात अलग प्रश्नों का उत्तर देते हैं। बड़ी कक्षा में होने से ग्रह का स्वयं बड़ा होना जरूरी नहीं।

शुरुआत पर लौटें और सूर्य से प्रकाश भेजने का स्विच चालू करें। सामान्य चाल की तुलना के लिए 1.4 m/s की सेटिंग और अगले पड़ाव तक चलने की सुविधा लें। 60 सेकंड में दर्शक 84 m चल सकता है, जबकि मॉडल प्रकाश लगभग 18 m जाता है। बाधाएँ या मार्ग बदलना दर्शक की प्रगति बदल सकते हैं। इसलिए इन्हें सीधे मार्ग के अनुमान मानें, हर हाथ से चलाई गई चाल के लिए गारंटी नहीं। दाल का धीमा दिखना स्थानिक पैमाने का परिणाम है, वास्तविक जीवन में मनुष्य के प्रकाश से तेज होने का दावा नहीं।

अंत में मार्गदर्शिका से पृथ्वी, उसके चंद्रमा और बृहस्पति के चंद्रमाओं की तुलना करें। पृथ्वी का गोला सिर्फ 1.27 cm हो, तो चंद्रमा की 38.4 cm दूरी कम आँकना आसान है। दृष्टिकोण बदलते समय अंकित दूरी और दिखने वाले अंतर को अलग रखें। परिप्रेक्ष्य दूर की वस्तुओं को पास-पास दिखा सकता है। मॉडल अपने दृश्य में लंबाइयाँ सुरक्षित रखता है, पर कैमरा उन्हें समतल स्क्रीन पर प्रक्षेपित करता है। केवल स्क्रीनशॉट इस त्रिआयामी जगह का पैमाना नहीं है।

रास्ते पर 157 चीज़ें

गाइड में अब 157 चीज़ें हैं: सूर्य, आठ ग्रह, पाँच बौने ग्रह, 44 चंद्रमा, 40 क्षुद्रग्रह और धूमकेतु, 45 यान, और बारह सीमाएँ तथा तारे। हर वस्तु अपनी वास्तविक दूरी पर है और हर गोला सही पैमाने पर, इसलिए अधिकांश रेत से भी छोटे हैं। दो फ़िल्टर पंक्तियाँ हैं: प्रकार और रास्ते का भाग (सूर्य से मंगल, क्षुद्रग्रह पट्टी, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून, काइपर पट्टी और आगे)। नाम पृष्ठ की भाषा और अंग्रेज़ी या कोरियाई में खोजा जाता है। सही का चिह्न देखी गई चीज़ बताता है।

चंद्रमा JPL की कक्षा और आकार तालिकाओं की औसत दूरी पर हैं। पास वाले अलग कोणों पर हैं ताकि पिन एक-दूसरे को न छिपाएँ: मीटिस, अद्रास्टिया, अमलथिया और थीबी, बृहस्पति के चार छोटे भीतरी चंद्रमा, उसके 14 cm गोले से 23 cm के भीतर हैं। शनि के छल्लों के रखवाले पैन, एटलस, प्रोमीथियस और पैंडोरा 27 cm छल्ले के भीतर या ठीक बाहर हैं। तीन चंद्रमा रेल के लिए बहुत दूर हैं: हिमालिया बृहस्पति से 11.4 m, फ़ीबी शनि से 12.9 m और नीरीड नेपच्यून से 5.5 m, हर एक घास में अलग खंभे पर। प्लूटो के चार छोटे चंद्रमा बाल जैसे तारों पर उसके 2.4 mm मनके से 4 से 7 cm दूर हैं।

क्षुद्रग्रह और धूमकेतु JPL के छोटे पिंड डेटाबेस से हैं, जिसमें कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष और मापा गया व्यास मिलता है। नमूना अभियानों के लक्ष्य इतोकावा, बेन्नू और र्युगु यहाँ एक माइक्रोमीटर से छोटे हैं। बृहस्पति के ट्रोजन उसकी कक्षा में 60 डिग्री आगे और पीछे हैं। ओरस, पॉलिमेली, पैट्रोक्लस, यूरिबेटीस और ल्यूकस उसके चबूतरे से 15 m के भीतर खंभों पर हैं; सभी लूसी के लक्ष्य हैं।

ग्रह पर गए यान उसके प्रदर्शक पर दर्ज हैं; गाइड का प्रवेश वहीं ले जाता है। अंतरिक्ष के निश्चित बिंदु पर काम करने वालों का अलग चिह्न है: सोहो और डिस्कवर L1 पर, पृथ्वी के कंचे से 1.5 m आगे; वेब और यूक्लिड L2 पर, 1.5 m पीछे; पार्कर सोलर प्रोब और सोलर ऑर्बिटर अपने सूर्य से निकटतम बिंदुओं पर। यान वास्तविक आकार में नहीं बनते। एक अरबवें पैमाने पर सबसे बड़ा भी परमाणु से छोटा होगा, इसलिए ये संकेत हैं, मॉडल नहीं।

हर पड़ाव पर प्रदर्शक

सूर्य, हर ग्रह, सेरेस और प्लूटो के सामने आँकड़ों का कार्ड और बड़ा काट है। NASA की ग्रह जानकारी से कार्ड औसत व्यास, द्रव्यमान, दिन और वर्ष की अवधि, औसत तापमान और ज्ञात चंद्रमा दिखाता है। बुध का दिन सबसे लंबा: दोपहर से दोपहर तक 175.9 पृथ्वी दिन, यानी उसके 88 दिन वाले दो वर्ष। शुक्र उलटा घूमता है; उसका 116.8 पृथ्वी दिन का दिन लगभग आधा वर्ष है। शनि के 274 और बृहस्पति के 95 ज्ञात चंद्रमा दिखते हैं।

काट पैमाने पर नहीं है। यह 34 cm का गोला है जिसका चौथाई भाग निकला है। NASA की बताई परतें दिखती हैं: सूर्य का केंद्रक, विकिरण और संवहन क्षेत्र; पृथ्वी का भीतरी और बाहरी केंद्रक, मैंटल और भूपर्पटी; बृहस्पति और शनि की धात्विक हाइड्रोजन; यूरेनस और नेपच्यून की पानी, अमोनिया और मीथेन की बर्फ़। विशाल ग्रहों के आंतरिक मॉडल गुरुत्व माप पर आधारित हैं और बदल सकते हैं, इसलिए परतों के आकार अनुमानित हैं। पृथ्वी की परतें भूकंपीय तरंगों से मापी गई हैं और रास्ते के सबसे पक्के आँकड़े हैं।

कार्य, छिपी पट्टियाँ और नक्शा

«कार्य» पैनल के सात काम दृश्य में किए कार्य जाँचते हैं, क्लिक नहीं। एक में 8 मिनट 20 सेकंड पुराना सूर्य का प्रकाश खोजना है: पृथ्वी का चबूतरा। दूसरे में रेल के पास चलकर बृहस्पति के चार बड़े चंद्रमा मिलते हैं। एक प्रश्न है: वॉयेजर 1 तक टहलने में कितना समय? रास्ता 25.7 km होगा, उत्तर पाँच घंटे से थोड़ा अधिक है। सबसे अनोखी दौड़ में प्रकाश स्पंद चालू कर बुध पहले पहुँचें; इस पैमाने पर कोई भी कर सकता है।

घास में बिना नाम की 13 पीतल पट्टियाँ हैं। वे बुध, पृथ्वी, मंगल और प्लूटो के सूर्य से निकटतम और दूरस्थ बिंदु, एक मिनट और एक घंटे पुराना प्रकाश, वॉयेजर 1 की हल्के नीले बिंदु वाली तस्वीर का स्थान, और बृहस्पति के शूमेकर-लेवी 9 को तोड़ने का स्थान दिखाती हैं। «छिपी खोजें» टैब पास आने तक प्रश्नचिह्न दिखाता है, और निकटतम पड़ाव संकेत है।

नीचे का नक्शा 10.3 km रास्ते को पट्टी में समेटता है। रैखिक पैमाने पर चार भीतरी ग्रह सूर्य के एक पिक्सेल के भीतर होते, इसलिए नक्शा लघुगणकीय है; सफ़ेद तीर आपकी जगह दिखाता है। कहीं भी दबाकर निकटतम पड़ाव जाएँ। «आकार और दूरियाँ» एक ही ग्रह अरबवें पैमाने पर दो बार दिखाता है: साथ रखे गोले और रास्ते पर बिंदु। गोले दिखाने के लिए उनकी पंक्ति दूरी की पंक्ति से हज़ारों गुना बड़ी है; दोनों पैमाने लिखे हैं।

प्रकाश की गति से कार तक

गति बटन में छह स्तर हैं। टहलना, तेज़ चलना, दौड़ और साइकिल वास्तविक मानवीय गतियाँ हैं। कार 25 m/s, यानी 90 km/h से नेपच्यून तीन मिनट में पहुँचती है। प्रकाश सबसे धीमा, 0.30 m/s है, क्योंकि उसके 299,792 km प्रति सेकंड को अरबवाँ किया गया है। केवल प्रकाश की गति पर घड़ी और प्रकाश समय हमेशा बराबर हैं: 8 मिनट 19 सेकंड में पृथ्वी पहुँचते हैं।

कक्षाएँ वृत्त नहीं

हर गोला ग्रह की औसत दूरी पर है, मगर कोई कक्षा पूर्ण वृत्त नहीं। बुध 46.0 से 69.8 मिलियन km तक जाता है; पट्टियाँ 24 m दूर हैं। पृथ्वी की पट्टियाँ 147.1 और 152.1 m पर केवल 5 m अलग हैं, और पृथ्वी जनवरी की शुरुआत में सूर्य के निकटतम होती है। इसलिए दूरी ऋतुओं का कारण नहीं। प्लूटो की कक्षा सबसे लंबी-खींची है: 4,436.8 m का निकटतम बिंदु नेपच्यून के चिह्न के भीतर है। 1979 से 1999 तक प्लूटो सच में नेपच्यून से अधिक सूर्य के पास था।

सवाल-जवाब

एक अरबवाँ ही क्यों, इससे छोटा पैमाना क्यों नहीं?

क्योंकि एक अरबवें पैमाने पर पृथ्वी अब भी ऐसी गेंद है जिसे आप देख और पकड़ सकें, और नेपच्यून तक जाना सैर है, सड़क यात्रा नहीं। एक दस-अरबवें पैमाने पर, जैसे नेशनल मॉल पर, पृथ्वी 1.3 mm की पिन की नोक रह जाती है। दस करोड़वें पैमाने पर सूर्य 13.9 m चौड़ा होता और नेपच्यून 45 km दूर।

पूरा रास्ता चलने में कितना समय लगेगा?

आम 1.4 m/s पर पृथ्वी तक दो मिनट से कम, नेपच्यून तक 54 मिनट, प्लूटो तक 70 मिनट और एरिस के बाद रास्ते के अंत तक दो घंटे से थोड़ा ज़्यादा लगता है। 25.7 km पर वॉयेजर 1 पैदल लगभग पाँच घंटे दूर होता।

जहाँ मैं खड़ा हूँ वहाँ से अगला ग्रह क्यों नहीं दिखता?

क्योंकि फ़ासले बहुत बड़े हैं और गेंदें छोटी। पृथ्वी के चबूतरे से मंगल 78 m दूर 6.8 mm का मटर है। वह 0.005° घेरता है, लगभग उतना जितना हाथ भर दूर पकड़ा इंसानी बाल। दिशा-पट्ट और पेंट किए निशान इसीलिए हैं कि आपको पता रहे किधर देखना है।

क्या प्लूटो ग्रह है?

2006 से अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ प्लूटो को बौना ग्रह मानता है। यह गोल है और सूर्य का चक्कर लगाता है, पर इसने अंतरिक्ष के अपने हिस्से को दूसरे पिंडों से साफ़ नहीं किया है: इसके आसपास की काइपर बेल्ट में मिलते-जुलते आकार के कई पिंड हैं। सेरेस, एरिस, हॉमिया और माकेमाके इसी कारण बौने ग्रह हैं।

क्या क्षुद्रग्रह पट्टी पार करता यान किसी चीज़ से टकराएगा?

लगभग निश्चित रूप से नहीं। पार्क में पट्टी 150 m गहरी है, और उसकी चट्टानें धूल से भी छोटी होतीं। पायनियर 10 इसे पार करने वाला पहला यान था, 1972 और 1973 में, और तब से हर बार पार करना बिना किसी घटना के रहा है।

सौरमंडल का किनारा कहाँ है?

यह इस पर निर्भर करता है कि आप किसे गिनते हैं। हीलियोपॉज़, जहाँ सौर पवन अंतरतारकीय गैस को जगह देती है, लगभग 120 AU दूर है (पार्क में 18 km)। सूर्य का गुरुत्व इससे कहीं आगे ऊर्ट बादल के धूमकेतुओं को थामे रहता है, शायद 100,000 AU तक (यहाँ 15,000 km)।

इस पैमाने पर एक प्रकाश वर्ष कितना होता है?

एक प्रकाश वर्ष 9.46 ट्रिलियन km है, इसलिए पार्क में यह 9,461 km है, पृथ्वी के चक्कर का लगभग एक चौथाई। 4.25 प्रकाश वर्ष दूर प्रॉक्सिमा सेंटॉरी सूर्य की गेंद से 40,208 km पर पहुँचता है।

धूप को पृथ्वी तक 8 मिनट क्यों लगते हैं, पर नेपच्यून तक 4 घंटे?

क्योंकि प्रकाश हर सेकंड एक तय 299,792 km चलता है। नेपच्यून सूर्य से पृथ्वी की तुलना में 30 गुना दूर है, इसलिए उसका प्रकाश-समय भी 30 गुना लंबा है: 8 मिनट 19 सेकंड × 30.2 लगभग 4 घंटे 11 मिनट।

क्या गेंदें घूमती हैं?

धीरे-धीरे, ताकि आप उनकी सतह बदलती देख सकें। इस आकार में असली घूर्णन इतना धीमा होता कि पता ही न चले, बृहस्पति और शनि को छोड़कर, जो लगभग दस घंटे में एक चक्कर लगाते हैं।

मॉडल छोटा करने से प्रकाश का विलंब भी घटता है?

नहीं। यहाँ केवल लंबाइयाँ घटाई जाती हैं। मॉडल में प्रकाश की गति लगभग 0.30 m/s है, इसलिए सूर्य से पृथ्वी तक का विलंब लगभग 499 सेकंड ही रहता है। तेज चलने से दर्शक की गति बदलती है, प्रकाश-दाल या वास्तविक प्रकाश की गति नहीं।

यहाँ प्रकाश चलने से धीमा क्यों है?

केवल लंबाइयाँ घटी हैं। प्रकाश पृथ्वी तक अब भी 499 सेकंड लेता है, मगर पृथ्वी 149.6 m दूर है। यहाँ प्रकाश 499 s में 149.6 m, लगभग 0.30 m/s चलता है। 1.4 m/s की टहल लगभग पाँच गुनी तेज़ है। वास्तविक प्रकाश विलंब नहीं बदलता।

कुछ चंद्रमा घास में दूर क्यों हैं?

वे वास्तव में इतने दूर हैं। हिमालिया बृहस्पति से 11.4 मिलियन km, फ़ीबी शनि से 12.9 मिलियन km और नीरीड नेपच्यून से औसतन 5.5 मिलियन km है। इतनी लंबी रेल रास्ता काटेगी, इसलिए हर एक सही दूरी के अलग खंभे पर है।

यानों की स्थितियाँ कहाँ से आती हैं?

ग्रहों के पार यानों की सूर्य से दूरियाँ अक्टूबर 2026 की हैं। कक्षीय या उतरे यान अपने पिंड पर दर्ज हैं। L1 और L2 वाले पृथ्वी से सूर्य की ओर या पीछे 1.5 मिलियन km पर हैं। यूरोपा क्लिपर और जूस जैसे यात्रारत अभियान लक्ष्य पर आगमन वर्ष के साथ दर्ज हैं।

कुछ काट अनुमानित क्यों लिखे हैं?

पृथ्वी की परतें भूकंपीय तरंगों से मापी गई हैं, और मंगल का केंद्रक इनसाइट के भूकंपमापी से। बृहस्पति, शनि, यूरेनस या नेपच्यून के भीतर भूकंपमापी नहीं भेजा गया। उनके मॉडल गुरुत्व और चुंबकीय माप से मेल खाते हैं, इसलिए प्रदर्शक के आकार अनुमानित हैं।

क्या दूसरे सभी ग्रह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच समाते हैं?

हाँ, मुश्किल से। बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून के औसत व्यास कुल 380,016 km हैं; चंद्रमा की औसत दूरी 384,400 km है। पृथ्वी के चबूतरे की एक छिपी पट्टी यह बताती है। यहाँ कंचे और चंद्रमा के मनके में 38.4 cm का अंतर है।

शब्दावली

  • AU (खगोलीय इकाई): 14,95,97,870.7 km, मोटे तौर पर पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी। पार्क में यह 149.6 m है।
  • अर्ध-दीर्घ अक्ष: दीर्घवृत्ताकार कक्षा की सबसे लंबी चौड़ाई का आधा, यहाँ ग्रह की सूर्य से औसत दूरी के रूप में लिया गया।
  • प्रकाश-समय: 299,792.458 km प्रति सेकंड की रफ़्तार से प्रकाश को कोई दूरी तय करने में लगने वाला समय।
  • बौना ग्रह: एक गोल पिंड जो सूर्य की परिक्रमा करता है पर जिसने अपनी कक्षा को दूसरे पिंडों से साफ़ नहीं किया।
  • काइपर बेल्ट: नेपच्यून से आगे बर्फ़ीले पिंडों का छल्ला, सूर्य से लगभग 30 से 50 AU।
  • ऊर्ट बादल: धूमकेतुओं का दूर का खोल जो माना जाता है कि सौरमंडल को घेरे है, कभी सीधे नहीं देखा गया।
  • हीलियोपॉज़: उस बुलबुले का किनारा जिसे सौर पवन अंतरतारकीय अंतरिक्ष में फुलाती है।
  • L2: पृथ्वी से 15 लाख km आगे, सूर्य की उलटी ओर का एक बिंदु, जहाँ कोई यान पृथ्वी के साथ क़दम मिलाकर रह सकता है।

स्रोत

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